I have made a few tweets on Nationalism on Twitter. Here I am presenting a collection of my tweets. Besides gender and public space, gender and nationalism is my other important topic of research and it is becoming more and more important in the wake of the rising hyper masculine aggressive Hindu nationalism in India which is severely affecting Hindu women’s individual right. Family, community and the state everybody is trying to lay a claim over and control women bodies, what we call the gendered nationalism. But before I come to women here are some thoughts on nationalism, in Hindi, because moving forward, I want to capture a different set of audience than what my blog traditionally have had.

राष्ट्रवाद भय और घृणा के मिश्रण से बनी एक ऐसी भावना है जिसमे आप कुछ ज़िद पे अड़ जाते हो – जैसेके पहला, मेरा देश सबसे अच्छा है क्यूंकी मैं यहाँ पैदा हुई थी; दूसरा, मेरा देश सबसे अछा था, लेकिन बाहर के लोगो ने इसे खराब कर दिया; तीसरा, कुछ चुने हुए पहचान के लोग ही मेरे देश के असली हकदार है और सिर्फ़ उन्हे ही यहाँ रहने का हक़ है. राष्ट्रवाद का आधार है विभाजन, कौन अपना कौन पराया – “देश मेरा है तुम बाहर से आये हो।” लेकिन, इस हिंसा का कोई अंत नही है, अंदर वाले – बाहर वाले कि लड़ाई के बिना राष्ट्रवादी का कोई अस्तित्व नही रहता।

राष्ट्रवाद को ज़िंदा रखने के लिये दुश्मन पैदा करना ज़रूरी है, और युवाओं को उस काल्पनिक दुश्मन से लड़ने के लिए तैयार करना। क्या आपने कभी सोचा है के डेमोक्रेटिक देश में कानून व्यवस्था के रहते RSS को लाठी तलवार युद्ध की ट्रैनिंग देने की क्या ज़रूरत है? क्योंकि राष्ट्रवाद और militarianism (सैनिकों की महिमागान) साथ साथ चलते है। राष्ट्रवाद युवाओं को लगातार किसी एक दुश्मन के खिलाफ भड़काती है।

Militarization के चलते खून खराबा मार पीट अत्यधिक पौरूष को गौरवमय बताया जाता है। गौ रक्षा करने वाले मर्द तभी इंसान को बे झिझक मार देते है। इसी राष्ट्रवाद और militarization का असर महिलाओं पे भी पड़ता है। राष्ट्रवाद देश को मा, देशवासीयों को पुत्र, और महिलाओं को मा बेटी बहन जैसे सम्बंध मानती है। दिमाग में यह घुस जाता है के महिलाएं मेरी (संपत्ति) है, कमजोर है, दुश्मन उन्हें नष्ट करने या चुराने आये है।

अभी कुछ दिन पहेले आरएसएस के मोहन भागवत ने कहा था, के आर्मी को तो तिन चार महीने लगेंगे सेना तैयार करने में, लेकिन हम तो तिन दिन में खरा कर देंगे. हमे ये समझना चाहिए के ऐसा कर पाना कोई अछी बात नही है, कोई भी दल अगर ऐसा बयान दे तो सरकार को उसमे गर्व नही चिंता जतानि चाहिए. ये पता लगाना चाहिए के इस दल के पास कहाँ से मिलिटरिज़ेशन की शक्ति मिली, कौन है इसके पीछे? जितनी चिंता ह्मे इस बात पे होनी चाहिए के कश्मीर के अलगावादी हतियार क्यू और कैसे उठा लेते है, ठीक उसी तरह हमे ये भी सोचना चाहिए के गौ रक्षक कैसे हतियार उठा लेते है?

ये मान लीजिए के राष्ट्रवाद + मिलिटरिज़ेशन मानव अधिकार के संदर्व से अच्छी बात नही है, देश के सिविलियेन्स को हथिरार उठाने के लिए प्रेरित करना ग़लत है. यहाँ तक के पुलिस को भी इतनी ताक़त नही दी जानी चाहिए के वो आर्मी जितना शक्तिशाली बन जाए. इस विषय पे अमेरिका भी चिंता जता रही है, ये वीडियो देख सकते है. https://www.youtube.com/watch?v=MciowYcyFCU

अपने देश में तो cow lovers भी armed forces है.

क्यूँ हम राष्ट्रवाद के बारे में बात कर रहे है?

क्यूँ की पहेली बार भारत में राष्ट्रवादी सोच का पल्ला भारी है. मोदी के PM बनने के बाद से राष्ट्रवाद देश का सबसे अहम मुद्धा बन गया है, नाकी रोटी कपड़ा मकान. राष्ट्रवाद के नाम पे लोग मर रहे है. ऐसा क्यूँ? समझना ज़रूरी है.

राष्ट्रवाद एक कहानी है। फ़िल्म स्क्रिप्ट की तरह एक रचनाकार इसे रचता है, स्थान काल पात्र की रचना की जाती है, विलन, हीरो, अबला नारी विक्टिम – सब काल्पनिक है। और ये बहत ही घटिया फॉर्मूला फ़िल्म है। Congress देश चला रहे थे, सही या गलत, BJP कहानी रच रहे है।

Why we must learn about nationalism because BJP changed the narrative from Hindu Muslim Sikh Isai aapas mein sab bhai bhai to Hindu khatre mein hai, #LoveJihad which was completely uncalled for and baseless, and a political strategy by RSS backed BJP. Divisive politics, polarization was invented by BJP. Literally invented.

देश प्रेम और अनेकता में एकता का पाठ हम बचपन से पड़ते आये है। आज़ादी के बाद सरकार ने कई जन हित मैं जारी सूचना, म्यूजिक वीडियो, नाटक, डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म, बनाई – मिले सुर मेरा तुम्हारा, देश में एका रहे, इत्यादि।

विभाजन का नारा, हिन्दू खतरे में है पहली बार 90s मैं BJP ने लगाया।

आज़ादी के समय भारत के निर्माणकर्ताओं के आगे एक मुख्य चुनौती ये थी के देश की जनता धर्म जाती और भाषा के नाम पे न लड़े। साथ ही ये भी ज़रूरी था के मात्र 4-5% मुसलमान को भय न रहे, हिन्दू उनपे हावी न हो जाये, उनको ये ना लगे के देश उनका नही है। इसलिए, उनपे खास ध्यान दिया गया। अभी अभी देश विभाजन के सदमे से झूझती हिन्दू मुसलमान दोनों को एकता का पाठ देना जरूरी था। साथ ही अल्पसंख्यक मुस्लिम पे खास ध्यान देना ज़रूरी था। ठीक जैसे मा बाप अपने छोटे कमज़ोर बच्चों पे ज़्यादा ध्यान देते है। बड़ा भाई गुस्सा होता है, आप छोटे से ज़्यादा प्यार करते हो।

भारत के हिन्दू मुसलमान मा बाप के दो बेटों के तरह है, मुसलमान थोड़ा कमज़ोर था, उसपे ज़्यादा ध्यान दिया गया संविधान में, सरकार से।मौका देख के आई BJP, शकुनि / मंथरा की तरह बड़े भाई को छोटे के खिलाफ भड़काने। हिन्दू खतरे में है झूठ से कान भर दिया, हात मैं हतियार दे दिया।

जो भी BJP ने किया वो सत्ता पाने के लिए किया। अपने लिये किया, उन्हें देश की या हिन्दुयों कोई परवाह नही। शकुनि ने छल कपट से पाण्डव और कौरव को लड़ाया, भाजपा ने हिंदू मुसलमान को। आज भी इसी मुद्दे पे चुनाव लड़ते है, जीतते है। #साम्प्रदायिकता #सेकुलर

बीजेपी ने देश को हिन्दू और मुसलमानों में बाँटने का काम 1990s शुरू किया ये कह के हिन्दू खतरे में है। दरअसल भारतीय ख़तरे मैं थे, है। भूख, बेरोज़गारी से खतरा। ऐसे में BJP ने जो थोड़ासा खास ध्यान मुसलमान पे दिया जाता है उसके खिलाफ हिन्दू को भड़काया, मुस्लिम अपीसमेन्ट का नाम दिया।

अगर गरीब मा बाप अपने कमज़ोर बच्चे को थोड़ा ज़्यादा खाना खिलाये, एक के जगह दो अंडे दे तो उसे minority appeasement नही affirmative action कहते है। या quota भी। ये सरकार का कर्तव्य है। ऐसा संविधान में है, कोई कांग्रेस का बनाया नही हैं। BJP ने इसे गलत नाम दिया, हिंदुओ को भड़काया.

ये बहत दुख की बात है के जनता को भड़काना भाजपा के लिये इतना आसान है, धर्म और परिचय बिषय ही ऐसे है, लोग भावुक हो जाते हैै। इसीलिए होलोकास्ट हो पाया। तभी गौ माताओ, हिन्दू बहन बेटियों को काल्पनिक मुसलमान दुश्मन से बचाने में लगे है जबकि दोनों को ज़्यादा खतरा हिंदुओ से ही है।

राष्ट्रवादी किसीके भी सगे नही होते।

लेकिन याद रहे, राष्ट्रवाद किसिका सगे नही होता. जैसा की मैने कहा, अपने अस्तित्व के लिए वो दुश्मन पैदा करते है। राष्ट्रवाद को ज़िंदा रखने के लिए किसी ना किसी को “अन्य” या other बनाना ज़रूरी है, एक ऐसा काल्पनिक दुश्मन जिससे आप का डर भी बना रहे और घृणा भी. इंडिया मे आज मुसलमान या क्रिस्चियन वो “अन्य” है, लेकिन कल को दलित होंगे, परसो गुर्जर, फिर बंगाली बन जाएगा. होता ये है के धीरे धीरे इंसान के अंदर अलग प्रथा को समझने या अपनाने की इच्छा चली जाती है. जो भी अपने से अलग दिखे, उसे राष्ट्रवाद अपना दुश्मन बना लेते है, और इसीलिए भारत जैसे देश मे जहाँ सैंकरो भाषा, रहन सहन, जाती, धर्म है वहाँ एकात्मक सोच वाली राष्ट्रवाद का ज़ब्रन लागू करना भयनकार है. इससे सिर्फ़ हिंसा बडेगि.

 

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